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पड़ोस में रहने वाली लड़की

Pados me rahne wali ladki:

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मेरा नाम मोहन है मैं 24 वर्ष का युवक हूं और मैं सूरत में रहता हूं। मेरे पिताजी साड़ियों के व्यापारी हैं और वह काफी समय से यह काम कर रहे हैं। मेरा कॉलेज का यह आखिरी वर्ष है और इसीलिए मैं काफी अच्छे से पढ़ाई कर रहा हूं लेकिन मैं पढ़ने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं हूं और मुझे यह बात अच्छे से पता है कि इसके बाद मुझे अपने पिताजी का ही कारोबार संभालना है इसलिए मैं सिर्फ पास होने की कोशिश कर रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि मैं इस वर्ष अपने कॉलेज की परीक्षा में फेल हो जाऊं, मैं अपनी पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान दे रहा हूं और मैंने अपने दोस्तों से भी नोट्स मांगने शुरू कर दिए हैं। मेरे दोस्तों ने मेरी बहुत मदद की। कुछ समय बाद एग्जाम होने वाले है और मैं बहुत मेहनत कर रहा हूं। कुछ दिन बाद मेरे एग्जाम भी खत्म हो गए। मैंने इस वर्ष अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब मैं अपने पिताजी के साथ उनका काम संभालने लगा हूं।

मुझे उनका काम संभालने में बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि मैं पहले से ही चाहता था कि मैं अपने पिताजी के साथ काम करूं। मेरे जितने भी दोस्त हैं वह सब भी पास हो चुके हैं और वह सब भी कुछ ना कुछ कर रहे हैं। कोई नौकरी कर रहा है और कोई अपना बिजनेस खोल कर बैठा हुआ है। हमारे पड़ोस में ही एक एक अंकल आंटी रहते हैं, उनके घर पर एक लड़की रहने के लिए आई। मुझे नहीं पता कि वह कौन है लेकिन मैंने उसके बारे में अपनी बहन से पूछा, मेरी बहन ने बताया कि वह कॉलेज कर रही हैं और उसका नाम पारुल है। मैंने अपनी बहन से कहा कि वह मुझे बहुत अच्छी लगती है, यदि तुम उससे मेरी बात करवा पाओ तो मुझे बहुत खुशी होगी लेकिन मेरी बहन कहने लगी कि मैं भी उससे इतना बात नहीं करती हूं कि मैं तुम्हारी बात उससे करवाऊँ मेरी एक आद बार ही उससे बात हुई है  उससे ज्यादा मेरी कभी भी उससे कोई बात नहीं हुई। मुझे पारुल बहुत ही अच्छी लगती है इसलिए मैं जब भी उसे देखता तो उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता था लेकिन मैं उससे बात करने की हिम्मत नहीं कर पाया। एक दिन मैं बड़ी तेजी में चल रहा था और उस दिन पारुल भी सामने से आ रही थी, अचानक से उसकी और मेरी टक्कर हो गई।

हम दोनों की टक्कर इतनी जोरदार हुई कि वह नीचे गिरने वाली ही वाली थी तो मैंने उसे बचा लिया और उसके हाथ में जो सामान था वह इधर-उधर फैल गया। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम कोई टेंशन में हो वह कहने लगी नहीं मेरा ध्यान कहीं और था इसलिए मैं आपसे टकरा गई। उसने मुझे सॉरी बोला और जो सामान उसके हाथ में था वह नीचे गिर चुका था। मैंने उसका सामान उठाया और उसे सामान देते हुए कहा कि क्या तुम यही पड़ोस में रहती हो। वह कहने लगी हां मैं यही पड़ोस में रहती हूं। उस दिन मेरी बात पारुल से हो गई और उसके बाद मैं अपने काम पर चला गया लेकिन मैं सारे दिन भर पारुल के बारे में सोचता रहा, उसकी तस्वीर मेरे दिमाग में छप चुकी थी और मैं उसके बारे में ही सोच रहा था। अब जब भी मैं अपने घर से निकलता तो पारुल मुझे दिख जाती है और हम दोनों ही आपस में बात करते हैं। मुझे पारुल से बात करना भी अच्छा लगता था लेकिन हम दोनों की बातें अभी इतनी नहीं बनी थी कि मैं उससे अपने दिल की बात कह पाता। एक दिन वह हमारे मोहल्ले की दुकान से सामान ले रही थी और उस दिन मैं भी वहीं पर खड़ा था, मैंने उससे बात कर ली और उसे कहा कि क्या तुम्हें पानी पुरी पसंद है, वह कहने लगी हां मुझे पानी पुरी बहुत पसंद है। मैंने उसे कहा कि हमारे ही कॉलोनी के बाहर एक पानी पुरी वाला है, वह बहुत ही अच्छी पानी पुरी देता है। मैं उसे वहां पर ले गया और हम दोनों स्टूल में बैठकर पानी पुरी खा रहे थे। पारुल कहने लगी यह तो बहुत ही अच्छा है। पारुल और मैं अब वहां बैठ कर पानी पूरी खा रहे थे और आपस में हम लोग काफी बात कर रहे थे। मुझे पारुल के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा था और उसके बाद हम दोनों ही घर चले गए।

उस दिन मैंने उसका फोन नंबर भी ले लिया था। उसने जब मुझे अपना नंबर दिया तो उसके कुछ देर बाद ही मैंने उसे फोन कर दिया और वह अपने घर पर ही थी। मैं पारुल से बात करने लगा और उसके बाद मैंने उसे कहा कि मैं कुछ काम से कहीं बाहर जा रहा हूं, मैं तुम्हें रात को फोन करूंगा। अब मैं अपने काम से बाहर चले गया और मैं जब अपने काम से लौटा तो मैंने पारुल को फोन कर दिया लेकिन उस वक्त बहुत ज्यादा रात हो चुकी थी, पहले उसने मेरा फोन नहीं उठाया, मुझे लगा कि शायद वह सो गई होगी मैं भी उस दिन सो गया और जब अगली सुबह मैं उठा तो पारुल ने मुझे फोन किया और कहने लगी कि रात को मैं तुम्हारा फोन नहीं उठा पाई क्योंकि मुझे नींद आ गई थी। मैं उसे कहने लगा कोई बात नहीं, क्या हम लोग आज मिल सकते हैं। वह कहने लगी ठीक है हम लोग आज मिल लेते हैं। मैंने पारूल को कहा कि तुम हमारे घर के पास वाले पार्क में आ जाना, वह पार्क में आ गई और हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे। मुझे पारुल के साथ में बैठ कर बात करना अच्छा लग रहा था और वह भी बहुत खुश हो रही थी, वह कह रही थी कि मुझे तुम्हारे साथ बात करना बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने उससे पूछा कि तुम अपनी पढ़ाई करने के बाद क्या करने वाली हो, वह कहने लगी कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पापा के साथ चली जाऊंगी। मैंने उसे पूछा कि तुम्हारे पापा कहां रहते हैं, वह कहने लगी कि मेरे पापा विदेश में रहते हैं और वह वहां नौकरी करते हैं। मुझे उसने यह कभी नहीं बताया कि उसकी मम्मी का देहांत हो चुका है  जब पारुल ने यह बात कहीं तो वह भावुक हो गई थी और मैंने उसे गले लगा लिया। जब मैंने उसे गले लगाया तो उसके स्तनों मुझसे टकरा रहे थे। जब उसके स्तन मेरी छाती से रगडते तो मेरा पूरा मन खराब हो जाता। मैंने उसके बाद उसके होठों को पार्क में ही किस कर लिया और उसे बहुत अच्छे से चूसने लगा। वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी उसने भी मेरे बालों को पकड़ लिया और मेरे होठों को चूमने लगी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे किस कर रहा था और वह भी बहुत खुश थी। मुझे और पारूल को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैं उसे पार्क के अंदर वाली झाड़ियों में लेकर गया तो वहा पर एक पेड़ है उसके पीछे मैंने उसे नंगा लेटा दिया। जब मैंने उसे नंगा लेटाया तो वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और बहुत देर तक मेरे लंड का रसपान कर रही थी। मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब  वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती जाती। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया उसके बाद मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जब मेरा लंड उसकी योनि में गया तो वह चिल्लाने लगी और उसे बहुत तेज दर्द होने लगा। मैंने भी उसे बड़ी तेज तेज धक्के मारे जिससे कि उसके मुंह से आवाज निकल जाती। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे इस प्रकार से चोदे जा रहा था कुछ देर तक मैंने उसे ऐसे ही झटके दिए। उसके बाद मैंने उसे अपने ऊपर से लेटा दिया जब वह मेरे ऊपर लेटी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वह अपनी चूतडो को मेरे ऊपर नीचे ला रही थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह अपनी बड़ी बड़ी चूतडो को जब मुझसे मिलाती तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता। मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था और काफी देर तक मैंने उसके स्तनों को चूसा जिससे की उसका दूध बाहर निकलने लगा। हम दोनो की रगडन से जो गर्मी बाहर निकलने लगी मुझसे बिल्कुल भी झेली नही गई। मुझसे उसकी योनि की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और जैसे ही मेरा माल उसकी योनि में गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैं उसके बाद जैसे ही उठा तो मेरा वीर्य उसकी योनि से टपक रहा था। उसके बाद हम दोनों जल्दी से वहां से बाहर आ गए।


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