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गांव के तबेले मे चुदाई का सुख

Gaanv ke tabale me chudai ka sukh:

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मेरा नाम शर्मिला है मैं कोलकाता की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 26 वर्ष है मेरे पापा एक अच्छे पद पर हैं और वह बहुत ही सख्त व्यक्ति हैं, वह बड़े ही डिसिप्लिन किस्म के आदमी हैं और यदि कोई उनके सामने थोड़ी सी भी बत्तमीजी कर दे तो वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करते इसीलिए मेरे परिवार में जितने भी लोग हैं वह सब उनसे बहुत डरते हैं। हम लोग सब जॉइंट फैमिली में रहते हैं लेकिन घर में मेरे पापा की ही चलती है और उनके आगे कोई भी कुछ नहीं बोलता, हम लोग भी उनसे बहुत डरते हैं लेकिन उन्होंने हमें कभी भी काम करने से नहीं रोका इसीलिए मैं जिस कंपनी में काम करती हूं उस कंपनी में उन्होंने ही मेरी बात करवाई थी, उनके उन लोगों से अच्छे रिलेशन है और कोई भी उनकी बात कभी मना नहीं करता, शायद यही कारण है कि मेरी जॉब भी वहां पर लग गई। मेरे पापा के जितने भी दोस्त घर पर आते हैं वह सब कहते हैं कि तुम्हें अब तो बदल जाना चाहिए, अब तुम्हारे बच्चे बड़े होने लगे हैं लेकिन मेरे पापा का रवैया अभी भी बिल्कुल वैसा ही है जैसे पहले था।

उन्होंने हमें किसी भी चीज की कभी कमी नहीं होने दी लेकिन कभी कबार लगता है कि शायद उन्होंने हम पर कुछ ज्यादा ही बंदीसे डाल रखी हैं और इसी वजह से हम लोग उनके आगे बोलने की हिम्मत नहीं कर पाते। मेरी मम्मी तो उनके सामने बिल्कुल भी नहीं बोलती, मेरा छोटा भाई जो कि स्कूल में पढ़ता है वह भी चुपचाप अपनी पढ़ाई पर लगा रहता है और वह फालतू भी कहीं बाहर नहीं जाता यदि उसे कभी जाना भी होता है तो वह पापा से पूछ कर जाता है। मेरे कॉलेज में मेरे पीछे कई लड़के पड़े थे लेकिन मैंने इसी डर की वजह से किसी के साथ रिलेशन नहीं बनाया, कॉलेज के समय में मुझे एक लड़का बहुत पसंद था और वह मेरे पीछे काफी समय तक पढ़ा रहा, पर मैंने अपने पापा के डर की वजह से ही उससे बात नहीं की और उसके बाद मेरा कॉलेज खत्म हो गया तो वह मुझे कभी नहीं मिला लेकिन मैं जिस कंपनी में नौकरी करती हूं उस कंपनी में अनिल नाम का लड़का जॉब करता है, उसे मैं बहुत पसंद करती हूं क्योंकि वह दिखने में बहुत हैंडसम है और वह बहुत समझदार भी है लेकिन मैंने भी अनिल से अपने दिल की बात नहीं कही थी और उसने भी मुझसे कभी इस बारे में जिक्र नहीं किया परंतु जब एक दिन मेरी सहेली ने मुझे बताया कि अनिल तुम्हें बहुत पसंद करता है, उस दिन मैं अपने आप को ना रोक सकी और मैं उससे बहुत खुश हो गई।

मैंने अपनी सहेली से पूछा कि क्या वाकई में वह मुझे पसंद करता है, वह कहने लगी हां वह तुम्हें बहुत पसंद करता है और उसने ही मुझे यह बात बताई है, मैंने उसे कहा कि तो उसने मुझसे क्यों नहीं कहा, वह कहने लगी कि तुम्हें अनिल का नेचर तो पता है वह शर्माता बहुत है और अपनी बात बोलने में उसे बहुत डर लगता है, तुम से तो वह वैसे भी बहुत कम ही बात करता है। उस दिन के बाद से जब भी मैं अनिल को देखती तो उसे देख कर मैं स्माइल पास कर देती, मैं जब भी उसे देखकर स्माइल देती तो वह भी मुझे देख कर मुस्कुरा देता, अब धीरे-धीरे हम दोनों की बातें होने लगी थी और एक दिन अनिल ने मुझे प्रपोज कर दिया, उसने मुझे प्रपोज किया तो मैंने भी उसे मना नहीं किया लेकिन मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मेरे पिताजी बहुत ही सख्त हैं और वह बिल्कुल भी इन चीजों के पक्ष में नहीं रहते इसलिए मैं तुम्हें यह नहीं कह सकती कि मैं तुम्हारे साथ शादी करूंगी या फिर आगे तुम्हारे साथ जीवन बिता पाऊंगी, वह कहने लगा शर्मिला कोई बात नहीं यदि मैं तुम्हारे साथ कुछ समय भी बिताऊँ तो मेरे लिए अच्छा होगा, मुझे तुम्हारा साथ चाहिए और उसके बाद देख लेंगे कि आगे क्या करना है। हम दोनों की इसी बात पर सहमति बन गई और हम दोनों का रिलेशन अब धीमी रफ्तार से आगे बढ़ने लगा, हम दोनों को जैसे एक दूसरे की आदत सी हो गई थी, मैं अनिल के बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकती थी। एक दिन मेरे पापा कहने लगे कि हमें गांव जाना है, हमारा गांव कोलकाता के पास ही है मैंने यह बात अनिल को बताई तो अनिल भी मुझे कहने लगा मैं भी तुम्हारे गांव आना चाहता हूं, मैंने उसे कहा लेकिन तुम वहां पर कहां रहोगे, उसने मुझे कहा कि तुम अपने गांव का नाम बताओ, मैंने जब उसे अपने गांव का नाम बताया तो वह कहने लगा वहां पर मेरी मौसी भी रहती हैं।

जब उसने यह बात कही तो मैं और भी ज्यादा खुश हो गई और हम लोग कुछ दिनों बाद अपने गांव चले गए, मेरे साथ मेरे पापा भी थे इसलिए मैं ज्यादा कहीं बाहर नहीं जा सकती थी लेकिन अनिल हमेशा मुझे एक नजर देखने के लिए आ जाता था और हम दोनों की फोन पर तो बातें होती ही रहती थी, जब भी वह मुझे देखता तो मैं बहुत खुश होती, हम लोग गांव में एक हफ्ता रुकने वाले थे और अनिल भी एक हफ्ता गांव में रुकने वाला था। एक-दो दिन तक तो ऐसा ही चलता रहा लेकिन एक दिन मेरा मन अनिल से मिलने का बहुत ज्यादा होने लगा, मैंने अनिल को फोन किया और कहा कि मेरा तुमसे मिलने का बहुत मन है, वह कहने लगा मेरा भी तुमसे मिलने का बहुत मन है लेकिन तुम्हारे पापा के होते हुए हम दोनों का मिलना संभव नहीं है, मैं उससे कहने लगी मैं हिम्मत कर के बाहर आने की कोशिश करती हूं तुम मुझे कुछ वक्त दो, उसने मुझसे कहा ठीक है तुम देख लो यदि तुम घर से बाहर आ जाओ तो मैं तुमसे मिल लूंगा। मैं अगले ही दिन अनिल से मिलने के लिए बाहर चली गई, मैंने घर में बहाना बनाया, जब मैं बाहर गई तो मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मेरे पापा को पता ना चल जाए लेकिन मैंने हिम्मत करते हुए उस दिन घर से बाहर जाने की सोच ही ली।

मैं जैसे ही अनिल से मिली तो मैंने उसे गले लगा लिया हम दोनों एक जिस जगह पर खड़े थे वहां पर लोग आ जा रहे थे इसलिए मैंने सोचा हमें कहीं और जाना चाहिए। हम दोनों पैदल ही कुछ आगे तक चलने लगे, मैंने जब वहां एक तबेला देखा तो मैंने अनिल से कहा हम लोग वहां तबेले में चलते हैं, वहां शायद कोई ना आए। हम दोनों उस तबेले में चले गए और वहां पर वाकई में कोई भी नहीं आ रहा था। तबेले में थोड़ी बहुत गाय और भैंसे बंधी हुई थी लेकिन वहां आसपास कोई भी नहीं था। जब मैंने अनिल को गले लगाया तो अनिल मुझे कहने लगा मैं तुम्हारे लिए इतना तड़प रहा हूं। मैंने उससे कहा मैं भी तो तुम्हारे लिए कितना तडफ रही हूं। मैंने जैसे ही अनिल का हाथ पकड़ा तो अनिल ने मेरे होठों को चूमना शुरू कर दिया। वह जिस प्रकार से मेरे होठों को चूम रहा था मुझे मजा आ रहा था। उसने मेरे होठों को चूम कर मेरे होठों से खून निकाल दिया, जब अनिल ने मेरे होठों से खून निकाला तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी और मैंने अपने कपड़े उतार दिए। तबेले में गोबर की बदबू आ रही थी लेकिन हम दोनों के पास और कोई भी जगह नहीं थी जहां हम गले मिल सकते थे। अनिल ने मेरे पूरे बदन का रसपान किया, उसने मेरी गांड को भी बड़े अच्छे से चाटा, जब वह मेरे बदन को चाट रहा था तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी, जैसे ही उसने मेरी मुलायम योनि के अंदर अपने मोटे से लंड को डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा, उसका लंड मेरी योनि मे जाते ही मेरी योनि से खून की धार बाहर की तरफ निकल पड़ी, अनिल का लंड मेरी योनि के अंदर बाहर होता तो मेरे अंदर से उतनी ही ज्यादा गर्मी निकलती, मेरा योनि का पानी बड़ी तेजी से बाहर की तरफ को रिसाव होने लगा था। मैंने अनिल से कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स कर के बहुत मजा आ रहा है, तुमने मेरी सील तोड़ी मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। वह कहने लगा शर्मिला मैं तो कब से तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता था लेकिन आज तक मौका ही नहीं मिल पाया। यह कहते हुए वह मुझे बड़ी तेज से चोद रहा था। जब वह अपने लंड को मेरी योनि से टकराता तो मेरी चूतडे लाल ह जाती। मेरे अंदर से इतनी गर्मी निकालने लगी मेरी योनि का तरल पदार्थ बड़ी तेजी से बाहर आने लगा, जब अनिल का लंड मेरी चूत की गर्मी को नहीं झेल पाया तो उसका वीर्य भी बाहर गिर गया।


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