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चूत मेरी नाज़ुक और लंड मिला पतला

Chut meri nazuk aur lund mila patla:

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मेरा नाम राहुल है और मैं एक बहुत ही बड़ी कंपनी में कार्यरत हूं। मैं अपने घर में एकलौता लड़का हूं। मेरे पिताजी का भी देहांत काफी वर्ष पूर्व हो चुका था और हम लोग उसके बाद मुंबई में आकर बस गए। मैंने यही से अपनी पढ़ाई की और उसके बाद मैंने यहीं पर जॉब कर ली। मेरे पिताजी की मृत्यु के बाद जो पैसे हमे मिले थे,  उन पैसो से हमने यही मुंबई में घर ले लिया था। उसके बाद मैं नौकरी करने लगा। मेरी मां ने मेरा हमेशा ही बहुत ख्याल रखा है और मुझे कभी भी मेरे पिताजी की कमी महसूस नहीं होने दी। वह हमेशा कहती रहती थी कि तुम्हें चिंता करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है और तुम अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान दिया करो। इस वजह से मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई में ध्यान देता था और बाकि मैंने कभी भी किसी चीज पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए मैंने बहुत मेहनत की और अभी बहुत बड़ी कंपनी में एक अच्छे पद पर हूं। जिससे मेरी मां भी बहुत खुश है और मैं भी बहुत खुश हूं। जब भी मुझे समय मिलता है तो हम लोग घूमने चले जाते हैं। मैं अपनी माँ से बहुत ज्यादा प्रेम करता हूं। वह हमेशा कहती रहती है कि तुम मेरा बहुत ही ध्यान रखते हो और मुझे बहुत ही अच्छे से रखते हो लेकिन एक बार मेरी मां की तबीयत काफी खराब होने लगी।

मैं जब उन्हें डॉक्टर के पास ले गया तो उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है। कुछ दिनों के लिए हॉस्पिटल में ही एडमिट करना पड़ेगा। मैंने उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया लेकिन उनकी तबियत बहुत खराब थी और धीरे-धीरे उनकी तबीयत में सुधार होने लगा। जब उनकी तबीयत में सुधार होने लगा तो मेरी मां मुझे कहने लगी कि अब मुझे घर ले चलो। क्योंकि मुझे बहुत दिन हो चुके हैं हॉस्पिटल में और मुझे अब कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं तुम्हें घर ले चलता हूं। मैंने डॉक्टर से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कि तुम उन्हें दो दिन बाद घर ले जाना और घर में ही उनकी तबीयत का ध्यान रखना लेकिन वह कुछ ज्यादा काम ना करें इसका तुम्हे पूरा ध्यान रखना पड़ेगा। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप जो भी दवाइयां है, वह लिखकर दे दीजिए तो मैं उस हिसाब से उनकी घर में ही देखभाल कर लिया करूंगा। डॉक्टर ने कहा तुम्हें उनका बहुत ध्यान रखना पड़ेगा। मैंने कहा ठीक है मैं उनका ध्यान रख लूंगा और उसके दो दिन बाद मैं उन्हें हॉस्पिटल से ले गया। कुछ दिनों तक तो मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और मैं उनका ध्यान अच्छे से रख पा रहा था लेकिन जब समय बीतता चला गया तो मेरी छुट्टियां भी खत्म होने वाली थी और मुझे मेरी मां की चिंता भी हो रही थी उनका ध्यान कौन रखेगा। क्योंकि उन्हें समय पर दवाइयां खिलानी पड़ती थी और उन्हें खाना भी समय पर देना पड़ता था। इस वजह से मुझे बहुत ही चिंता हो रही थी।

फिर मैंने सोचा कि मैं किसी नौकरानी को घर पर रख लेता हूं। जो मां का ध्यान भी रख ले। ताकि उनकी अच्छे से देखभाल भी हो पाएगी। फिर मैंने घर में एक नौकरानी रख ली। उसका नाम आशा था। जिस दिन वह पहली बार मुझे मिली तो मैंने उसे सबकुछ समझा दिया था कि तुम्हें मेरी मां का ध्यान बहुत ही अच्छे से रखना है और उन्हें किसी भी प्रकार से कोई भी कमी नहीं होनी चाहिए। यदि उन्हें किसी भी प्रकार से कोई कमी होगी तो मैं तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगा। वह कहने लगी कि ठीक है मैं आपकी मां का पूरा ध्यान रखूंगी। आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। अब मैं भी निश्चिंत हो गया था और कुछ दिनों तक मैं घर पर ही था। तो मैंने देखा कि आशा मां का ध्यान बहुत ही अच्छे से रख रही है। मैं बहुत ही संतुष्ट हुआ कि चलो कम से कम वह मेरी मां का अच्छे से ध्यान रखेगी। मैं कई बार इस विषय में अपनी मां से भी बात किया करता था कि आशा तुम्हारा ध्यान अच्छे से रखती है या नहीं। वह कहने लगी कि वह बहुत ही अच्छे से मेरा ध्यान रखती है और घर का सारा काम बहुत ही अच्छे से कर के रखती है। एक दिन मेरी छुट्टी थी तो मैंने उस दिन आशा से बात की और उसे कहा कि तुम्हे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत तो नहीं हो रही। वो कहने लगी मुझे किस प्रकार की दिक्कत होगी। मैं तो अपना पूरा काम समय पर कर लेती हूं और आपकी मां का भी ध्यान बहुत ही अच्छे से रख रही हूं। आप मुझे समय पर मेरी तनख्वाह भी दे देते हैं। ये तो मेरे लिए  बहुत ही अच्छा है। जिससे मेरा घर भी चल जाता है और मुझे अच्छा भी लगता है कि मैं आपकी मां की देखभाल कर रही हूं।अब ऐसे ही आशा मेरी मां का बहुत ही ध्यान रखती और मैं भी निश्चिंत होकर अपना ऑफिस का काम करता रहता।

जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन वह घर जल्दी आ जाती है। और मेरे लिए सुबह जल्दी नाश्ता बना देती। उस दिन भी मेरी छुट्टी थी और मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था। मैं पोर्न मूवी देख रहा था और मेरा लंड खड़ा हो रखा था। जब वह मेरे कमरे में सफाई करने आई तो मैंने उसके स्तन देखे तो मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसे अपने पास में बुला लिया और कस कर पकड़ लिया। जब उसने मेरा लंड को देखा तो उसने भी तुरंत मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और अच्छे से चूसने लगी। वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने भी उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया और उसके सारे कपड़े खोल दिए। जब मैंने उसके कपड़े खोले तो उसने लाल रंग की चड्डी पहनी हुई थी और मैंने उसके अंदर उसकी चूत मे उंगली डाल दी। जब मैंने उंगली डाली तो उसकी चूत पूरी गीली हो गई और मैं ऐसे ही बहुत देर तक अंदर बाहर करने लगा। अब मैंने उसकी पैंटी को उतारते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में गया तो वह कहने लगी साहब आपका लंड बहुत ही मोटा है।

मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जब आप मेरी चूत मे अपने लंड को डाल रहे हैं। मैं अब ऐसे ही उसे धक्के दिया जा रहा था और वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह मादक आवज निकाल रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे चोद रहा था। लेकिन उसका बहुत जल्दी झड़ गया और उसने अपने दोनों पैरों को मिला लिया। उसने अपनी चूत को इतना ज्यादा टाइट कर लिया कि मेरा माल भी उसकी योनि के अंदर ही जा गिरा। अब मैंने उसे डॉगी स्टाइल में बना दिया और जब मैंने उसकी योनि में दोबारा अपने लंड को हिलाते हुए डाला तो वह चिल्लाने लगी। वह कहने लगी आपने तो मेरी चूत फाड डाली। मैंने अब उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने शुरू किए और उसकी चूतडे मेरे लंड से टकराने लगी। मैंने उसे बहुत देर तक ऐसे ही चोदा। उसे बहुत ही मजा आने लगा जब मैं उसे झटक दिए जा रहा था। जब उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा तो उसने अपने चूतडो को मुझसे मिलाना शुरू कर दिया। वह ऐसे ही अपनी चूतडो को मुझसे सटाऐ जा रही थी। मुझे बड़ा मजा आता जब अपनी चूतडो को मुझ पर धक्के देती। मुझे बहुत ही आनंद आने लगा और मैं ऐसे ही उसे चोदने पर लगा हुआ था और मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों से बड़ी तेजी से कस कर पकड़ लिया और इतनी तेज तेज चोदा  कि मेरी पिचकारी उसके अंदर चली गई। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मेरा माल उसकी चूत से टपक रहा था। अब मैंने उसे अपने पास ही बैठा लिया और वह कहने लगी साहब आपने तो आज मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैं इतने दिनों से सोच रही थी कि मैं आपसे अपनी चूत मरवा लू लेकिन आज आपने खुद ही मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैंने आशा को कहा कि जब भी मेरा मन हुआ करेगा तो मैं तुम्हारे चूत मारा करूंगा। वह कहने लगी साहब मैं आपकी ही हूं जब आपका मन हो तो आप मेरी चूत मार लिया करना। अब जब भी मेरी छुट्टी होती तो मै आशा की चूत मार लिया करता था और उसे भी बहुत ही अच्छा लगता था जब मैं उसकी चूत मारता था। उसके बदले कभी कबार मै उसे कुछ गिफ्ट दे दिया करता या थोड़े बहुत पैसे दे देता तो वह उसमें ही खुश हो जाती थी।


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