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बुलेट की सीट पर चूत चुदाई

Bullet ki seat par chut chudai:

desi kahani, hindi sex story

मेरा नाम हिमांशु है मैं कुरुक्षेत्र का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा हूं। मेरे पिताजी कॉलेज में प्रोफेसर हैं, मेरे पिताजी मेरे कॉलेज में पढ़ाते हैं इसीलिए मैं कॉलेज में उनसे बचकर रहता हूं ताकि कभी उन्हें मेरी शरारतो का पता ना चल सके, वह बहुत ही सख्त किस्म के हैं और यदि उन्हें मेरी शरारतों की थोड़ी सी भी भनक लग जाए तो वह मुझे बहुत डांटते हैं इसलिए मैं उनसे बचकर ही रहता हूं। मेरे कॉलेज में जितने भी दोस्त हैं वह सब मुझे कहते हैं कि हिमांशु तुम्हारे पिताजी तो बहुत ही सख्त हैं क्योंकि वह उनकी भी कई बार अच्छे से क्लास लगा चुके हैं, वह लोग मेरे घर आने से भी बचते हैं और यदि कभी किसी को कोई काम होता है तो वह मुझे घर के बाहर ही बुला लेते है, मेरा कोई भी दोस्त मेरे घर के अंदर नहीं आता, शायद इसी वजह से मैं भी ज्यादा कहीं घूमने नहीं जा पाया।

एक बार मेरे दोस्त कपिल ने घूमने का प्रोग्राम बनाया, कपिल मुझे कहने लगा हिमांशु हम लोग कहीं घूमने चलते हैं, मैंने कपिल से कहा कपिल तुम्हें तो पता ही है मेरे पिताजी मुझे कहीं नहीं जाने देते, वह कहने लगा लेकिन तुम इस बार उनसे पूछ कर देखो, जब उनका मूड अच्छा हो तो तुम उस वक्त उनसे बात करना, हम लोग बुलेट से घूमने के लिए चलते हैं, जब उसने मुझे यह बात कही तो मेरा मन भी करने लगा कि मुझे भी जाना चाहिए। बुलेट मेरे पिताजी के पास पहले से ही थी और वह काफी पुरानी बुलेट है लेकिन मैंने भी घूमने का मन बना लिया था इसीलिए जब मैं घर पर गया तो मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मम्मी मैं घूमने के लिए जाना चाहता हूं, मेरी मम्मी कहने लगी तुम्हें तो पता है तुम्हारे पापा तुम्हें कहीं नहीं जाने देंगे, तुम घर पर ही रहो, मैंने अपनी मम्मी से कहा पापा कब तक मुझे छोटे बच्चों की तरह रखेंगे अब मैं बड़ा हो गया हूं और मेरी भी कुछ ख्वाहिशें हैं, मैंने उस दिन अपनी मम्मी को कन्वेंस कर लिया ताकि मैं घूमने जा सकूं।

मेरी मम्मी कहने लगी ठीक है मैं बात कर लूंगी यदि वह मान गए तो तुम चले जाना, वैसे मुझे उम्मीद कम ही लगती है कि वह तुम्हें जाने देंगे, मेरी किस्मत अच्छी थी कि कुछ ही समय बाद मेरे पापा का प्रमोशन हो गया और जिस दिन उनका प्रमोशन हुआ उस दिन वह बहुत ही खुश थे, मैंने भी उस दिन मौके पर चौका लगा दिया और उसी दिन मैंने उनसे बात कर ली। मैंने अपने पापा से कहा कि पापा हम दोस्त लोग घूमने का प्लान बना रहे हैं, मैं भी उनके साथ जाना चाहता हूं, उस दिन वह इतने ज्यादा खुश थे कि उन्होंने मुझे कहा ठीक है तुम चले जाना। मैं भी बहुत खुश हो गया और मैंने तुरंत अपने दोस्त को फोन कर दिया और कहा कि हम लोग कब घूमने के लिए जा रहे हैं, वह मुझे कहने लगा आज तुम बहुत खुश दिखाई दे रहे हो, मैंने उसे कहा अरे दोस्त मैं खुश नहीं हूं मेरे पापा का प्रमोशन हो चुका है क्या तुम्हें यह बात नहीं, वह कहने लगा मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। मैंने कपिल से कहा तभी तो मैं तुम्हें फोन कर रहा हूं और उन्होंने मुझे जाने की परमिशन भी दे दी है,  कपिल कहने लगा तुमने बिलकुल सही समय पर फोन किया हम लोग कुछ ही समय बाद घूमने के लिए जाने वाले हैं, हम लोग जिनके साथ जाने वाले थे वह कपिल के मोहल्ले के लड़के हैं। कपिल मुझे कहने लगा तुम एक काम करना तुम आज शाम को मेरे घर पर आ जाना, मैंने उसे कहा ठीक है मैं शाम को तुम्हारे घर पर आता हूं, मैं शाम को कपिल के घर पर गया तो वह कहने लगा चलो तुम्हारे पापा ने कम से कम तुम्हें कहीं बाहर जाने के लिए तो कहा नहीं तो वह तुम्हें घर पर ही अपने पास रखना चाहते हैं, मैंने उसे कहा कि तुम यह बात छोड़ो हम कितने लोग यहां से जाने वाले हैं तुम वह मुझे बताओ, कपिल मुझे अपने दोस्तों से मिलवाने के लिए लेकर गया उसके दोस्त उनके मोहल्ले की दुकान के बाहर खड़े थे, हम लोगों ने वहां पर प्लेन किया और जाने का पूरा प्रोग्राम बन गया, हम लोग सिर्फ 5 लोग ही थे और हमारे पास तीन बुलेट थी, अब हम लोगों का घूमने का पूरा प्रोग्राम बन चुका था और कुछ दिनों बाद हम लोग घूमने के लिए चले गए। मैंने अपने पापा से बुलेट भी ले ली थी उन्होंने उसकी सर्विस भी अच्छे से करवा दी थी ताकि रास्ते में कहीं गाड़ी खराब ना हो जाए, हम लोग जैसे जैसे पहाड़ियों पर चढ़ रहे थे मेरे अंदर और ज्यादा एक्साइटमेंट बढ़ रही थी और ठंड भी उतनी ही ज्यादा बढ़ रही थी, हम लोगों ने बीच में एक-दो जगह रुकने का प्रोग्राम भी बनाया था और हम लोग वहां रुके।

मेरे साथ कपिल का दोस्त बैठा हुआ था, हम लोगों ने सोचा कहीं पर रुक कर कुछ खा लेते हैं, हम लोग एक ढाबे पर रुक गए और वहां पर हम लोगों ने खाना खा लिया, जब हम लोग वहां से निकले तो मैं उस वक्त अकेला था, वह लोग आगे आगे चल रहे थे और मैं उनके पीछे चल रहा था, सफलर धीरे धीरे कटता जा रहा था हमे कुछ मालूम ही नहीं पड़ रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था। कपिल और उसके दोस्त थोड़ा आगे निकल चुके थे, मैं उनके पीछे ही था, मैंने तभी आगे देखा एक लड़की खड़ी है शायद उसकी बुलेट खराब हो गई थी, उसने मुझे हाथ दिखाते हुई मदद मांगी तो मैंने अपनी बुलेट रोकी उसने लंबी सी जैकेट पहनी हुई थी, जब उसने अपना हेलमेट निकाला तो मैं उसे देखकर बहुत खुश हो गया क्योंकि उसकी सुंदरता मुझे अपनी और खींच रही थी। जब मैं बुलेट से उतरा तो मैंने उसे पूछा हां मैडम बताइए आपकी गाड़ी खराब हो गई है। वह कहने लगी हां मेरी बुलेट खराब हो गई है, मैं कुछ देर उसकी बुलेट ठीक करने पर लगा हुआ था उसी बीच मैंने उसका नाम भी पूछ लिया, उसका नाम कविता था। जब हम दोनों बुलेट ठीक कर रहे थे, उसने जो जींस पहनी हुई थी उसमें उसकी गांड साफ दिखाई दे रही थी।

मैंने जैसे ही उसकी गांड पर हाथ लगाया तो वह मचलने लगी और कहने लगी क्या आप मुझे अपनी बुलेट में अपने साथ ले जा सकते हैं। मैंने उसे कहा क्यों नहीं लेकिन उससे पहले मैं ठंड का मजा तो ले लूं, मैंने उसे किस करना शुरू कर दिया, जब मैंने उसे किस किया तो वह भी अपने आपको नहीं रोक पाई, वह भी मेरे होठों को किस करने लगी, काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के होठों को चुसते रहे, वह पूरे तरीके से गर्म हो गई। मैंने उसकी जींस को उतारते हुए उसकी योनि को चाटाने शुरू किया, उसकी चूत में हल्के बाल थे और उसकी चूत से स्मेल आ रही थी लेकिन मुझे उसकी चूत को चाटने में बड़ा मजा आ रहा था। मैंने उसे बुलेट के ऊपर बैठा रखा था और जैसे ही मैंने उसकी नरम चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और मेरा लंड कविता की योनि के अंदर जा चुका था। मैंने उसे सीट के ऊपर अच्छे से बैठाया हुआ था और उसे बड़ी तेजी से मैं धक्के दे रहा था। मैं जब उसे झटके मारता तो उस ठंड में जो गर्मी का एहसास होता वह एक अलग ही अनुभव देने वाला था। मेरी सेक्स के प्रति रुचि और भी ज्यादा बढने लगी, वह पूरी गर्म हो गई, जब वह झडने वाली थी तो उसने अपने दोनों पैरों को मिला लिया और मैं उसे बड़ी तेजी से झटके मार रहा था लेकिन उसकी योनि से जो गर्म पानी बाहर निकला वह मेरे लंड को भी गर्म करने लगा। मैं ज्यादा समय तक उस गर्म पानी को नहीं झेल पाया और जैसे ही मेरा वीर्य पतन कविता की योनि के अंदर हुआ तो हम दोनों ने उस ठंड में बड़े मजे लिए। उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बनाकर भी काफी देर तक चोदा, जब मैंने उसे घोड़ी बनाया हुआ था तो वह अपनी चूतडो से मेरे लंड को टकराती तो मेरे अंदर से जो गर्मी पैदा होती, उस गर्मी को हम दोनों ज्यादा समय तक नहीं झेल पाए और जैसे ही मेरा वीर्य पतन कविता की योनि के अंदर हुआ तो मुझे उसे चोदकर बहुत मजा आ गया। उसके बाद मैंने उसे अपनी बुलेट पर बैठा लिया और मैं उसे अपने साथ लेकर चला गया, हम दोनों ने उसके बाद जमकर चूत चुदाई की।


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