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भाभी ने अपने सुडौल स्तनों से मुझे अपना दूध पिलाया

Bhabhi ne apne sudaul stano se mujhe apna doodh pilaya:

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मेरा नाम कपिल है मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है और मेरे घर में सब लोग मुझे  रेडियो कह कर बुलाते हैं। मैं सारे मोहल्ले की खबर रखता हूं और मेरे सब दोस्तों की भी जानकारी मेरे पास रहती है इसलिए मेरे जितने भी दोस्त हैं वह सब मुझे ही संपर्क करते हैं। कई बार तो मैंने अपने दोस्तों का ब्रेकअप होने से भी बचाया है और कईयों का ब्रेकअप मेरी वजह से भी हुआ है इसीलिए कुछ लोग मुझे अच्छा मानते हैं और कुछ लोग मुझे पसंद नहीं करते लेकिन जो लोग मुझे पसंद करते हैं वह मुझे हमेशा ही याद करते हैं और मेरा पूरा ध्यान रखते हैं। मुझे जब भी कोई भी चीज की आवश्यकता होती है तो वह तुरंत ही मुझे दिला देते हैं। मैं एक दिन शाम को घर पर बैठा हुआ था और मेरे पिताजी भी उसी वक्त दफ्तर से आए। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था और जब मेरे पिता जी मेरे पास आए तो कहने लगे क्या बात आज तुम घर पर ही हो आज तुम कहीं नहीं गए, मैंने अपने पिताजी से कहा क्यों आप मुझे क्या समझते हैं कि मैं सिर्फ घूमता ही रहता हूं।

वह कहने लगे नहीं मैंने तो तुमसे ऐसा कुछ भी नहीं कहा। मेरे पिताजी और मेरे बीच में 36 का आंकड़ा रहता है, वह हमेशा ही मुझ पर ताना मारते हैं और किसी ना किसी तरीके से वह मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं लेकिन मैं भी उनकी बात को समझ जाता हूं और हमेशा ही मैं भी उन्हें कह देता हूं कि आप मेरी कुछ ज्यादा ही बेज्जती करते हैं। उस दिन मेरे पिताजी ने मुझे कहा मेरा बोलने का मतलब यह नहीं था, मैंने तो सिर्फ तुमसे पूछा था और तुम तो बात को कहां से कहां घुमा रहे हो। मैंने अपने पिताजी से कहा इसमें बात घुमाने वाली कुछ भी नहीं है, आप हमेशा ही मुझ पर इसी प्रकार के ताने मारते हैं। इस वक्त मेरी मम्मी भी आ गई और मेरी मम्मी कहने लगी तुम दोनों आपस में क्यों झगड़ रहे हो, जब भी देखो तुम दोनों हमेशा ही झगड़ते रहते हो। मेरी मम्मी ने मेरे पापा को कहा तुम भी बच्चों की तरह झगड़ते रहते हो, मेरे पिताजी अपनी सफाई देने लगे और कहने लगे मैंने तो सिर्फ कपिल को पूछा ही था लेकिन वह दो मुझे ही उल्टा कहने लगा।

मेरी मम्मी कहने लगी चलो अब छोड़ो, तुम काम की बात करो, तुमने मुझे भी फोन किया था और कुछ कह रहे थे। मेरे पिताजी कहने लगे हां मैंने तुम्हें दिन में फोन किया था, राकेश का फोन मुझे आया था और राकेश कह रहा था कुछ दिनों के लिए तुम हमारे पास दिल्ली आ जाओ, राकेश मेरे बड़े भैया का नाम है वह मेरी भाभी के साथ दिल्ली में ही रहते हैं, वह दिल्ली में ही जॉब कर रहे हैं। मेरी मम्मी कहने लगी हम लोग दिल्ली जाकर क्या करेंगे, अभी कुछ दिनों बाद तुम्हारी बहन की लड़की की शादी भी है, उस वक्त यदि हम उनकी मदद के लिए नहीं रहेंगे तो वह लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे। मेरे पिताजी कहने लगे यह तो तुम बिल्कुल सही कह रही हो। मेरी मम्मी ने मुझे कहा कि कपिल तुम एक काम करना तुम ही कुछ दिनों के लिए अपने भैया के पास दिल्ली हो आओ, मैंने सोचा मैं भैया के पास जाकर क्या करूंगा। मैंने अपनी मम्मी को मना कर दिया और कहा कि मैं दिल्ली नहीं जाना चाहता, मेरी मम्मी कहने लगी तुम्हें जब कोई चीज कही जाती है तो तुम उस बात पर ही हमेशा पलट जाते हो तुम मेरी बात भी नहीं मानते। मैं अपनी मम्मी की बात को वैसे मना नहीं करता लेकिन उस समय मेरी जाने की इच्छा नहीं थी परंतु मेरी मम्मी मुझसे जिद करने लगी और कहने लगी तुम दिल्ली हो चले जाओ तुम्हें भी अच्छा लगेगा। मेरे पिताजी तो मुझसे कोई उम्मीद नहीं रखते उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं बोला और वह अपने रूम में चले गए। मेरी मम्मी मेरे पास आकर बैठी और कहने लगी तुम कुछ दिनों के लिए दिल्ली चले जाओ तुम्हारे भैया को भी अच्छा लगेगा। मैं अब दिल्ली जाने की तैयारी करने लगा और कुछ दिनों बाद ही मैं दिल्ली चला गया। मेरे दोस्त मुझे फोन कर कर के परेशान कर रहे थे और कहने लगे तुम हमारे पास क्यों नहीं आ रहे, मैंने उन्हें कहा कि मैं अपने भैया के पास आया हुआ हूं। मेरे दोस्त मुझे कहने लगे अच्छा तो तुम अपने भाई के पास चले गए, मैंने कहा हां मैं भैया के यहां आया हुआ हूं।

मेरे भैया जब ऑफिस होते तो मेरी भाभी पता नहीं किस से बात करती रहती, पहले मुझे लगा कि शायद वह अपने किसी रिश्तेदार से बात कर रही हैं लेकिन जब वह कुछ ज्यादा ही बात करने लगी तो मुझे लगा दाल में कुछ तो काला है इसलिए मुझे इस बात का पता लगाना पड़ेगा। मेरी भाभी कई बार घर से बाहर भी जाती थी, मैं एक दिन उनके पीछे पीछे चला गया। मैं जब उनके पीछे गया तो मैंने अपनी भाभी को एक नौजवान के साथ देखा और मैं उन्हें देखकर दंग रह गया क्योंकि मेरी भाभी सुरभि की मेरे दिमाग में एक अच्छी तस्वीर थी लेकिन जब मैंने उन्हें किसी अन्य युवक के साथ गले मिलते देखा तो मुझे उस दिन बहुत ही बुरा लगा। वह दोनों एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे और मैं उनके पीछे ही बैठकर सब कुछ देख रहा था, वह जिस प्रकार से एक दूसरे से बात कर रहे थे उससे साफ प्रतीत हो रहा था कि उन दोनों के बीच में कुछ तो चल रहा है। जब भाभी शाम को घर आई तो मैं भी घर पर ही था। मेरे भैया दफ्तर से आए नहीं थे, मैंने अपने भैया को फोन किया और कहा कि आप कब तक आ रहे हैं, वह कहने लगे मैं कुछ देर बाद ही आ जाऊंगा, क्यों कुछ काम था क्या, मैंने उन्हें कहा नहीं कोई भी काम नहीं था। मैंने फोन रख दिया मेरे सामने ही सुरभि भाभी बैठी हुई थी। मैने सुरभि भाभी से कहा भाभी आप तो आजकल  बडे मजे ले रही है। वह मुझे डांटते हुए कहने लगी तुम यह किस प्रकार की बात कर रहे हो। मैंने उन्हें कहा मुझे डांटने की आवश्यकता नहीं है आप ही मजे ले रही हैं और मुझे ही उल्टा दोषी ठहरा रही है।

मैंने भी उन्हें उनके आशिक के साथ उनकी फोटो दिखा दी अब वह भीगी बिल्ली बनकर मेरे सामने बैठ गई। मैंने उन्हें कहा आप तो बडे ही रंडीपने पर उतर आई हो। वह मुझसे कहने लगी यह बात तुम अपने भैया को मत बताना। मैंने उन्हें कहा आपके स्तन मुझे बड़े अच्छे लग रहे हैं आप मुझे अपना दूध पिला दीजिए। जब मैने उन्हें यह बात कही तो सुरभि भाभी झट से तैयार हो गई। उन्होंने अपने सूट को उतार दिया, उनके बड़े बड़े स्तन देखकर तो मेरा मूड खराब हो गया। मैंने उनके स्तनों को अपने मुंह में ले कर चूसना शुरू कर दिया और काफी देर तक उनके स्तनों का रसपान करता रहा वह पूरे मूड में थी और उनकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने जब उनके सलवार के नाड़े को खोला तो वह बड़ी उत्तेजित हो रही थी। मैंने उनकी पैंटी पर अपनी जीभ को लगा दिया उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। जब मैंने उनकी योनि के अंदर उंगली डाली तो वह चिल्लाने लगी, अब वह पूरे मूड में आ चुकी थी मैंने अभी तुरंत अपने लंड को उनकी योनि के अंदर घुसा दिया। मैंने इतनी तेजी से अपने लंड को उनकी योनि में डाला की मेरा लंड अंदर उनकी चूत की गहराइयों मे चला गया, वह बहुत तेज चिल्लाने लगी। मैंने उन्हें बड़ी तेज तेज झटके दिए, जिससे की उनकी चूत से पानी का रिसाव बाहर की तरफ हो रहा था। वह कहने लगी कपिल तुम्हारा लंड अपनी चूत मे लेकर मुझे बड़ा आनंद आ रहा है तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो और मेरी इच्छा पूरी कर दो। मैंने भी उन्हें कहा आप चिंता मत कीजिए मैं आपकी इच्छा आज पूरी कर दूंगा आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए। मैंने उन्हें बड़ी तेज तेज झटके देने शुरू कर दिए, मैंने उन्हें इतनी तेजी से झटके दिए कि उनकी चूत से तरल पदार्थ बाहर की तरफ निकलने लगा था वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी जब वह झडने वाली थी तो उन्होंने अपने दोनों पैरों को आपस में मिला लिया और मुझे कहने लगी तुम अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर ही डाल देना मुझे वीर्य को अपनी योनि में लेने में बड़ा आनंद आता है। मैंने भी अपने वीर्य को उनकी योनि के अंदर ही डाल दिया। भाभी के  चूत के मजे लेकर ऐसा लगा जैसे अब मैं हमेशा उन्हें चोदता रहूं। वह भी अपने मासूम से चेहरे को ले कर मेरे पास हमेशा आ जाती हैं।


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